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बांग्‍लादेश ने की अमेरिकी टैरि‍फ को तीन महीने के लिए टालने की मांग…

ढाका। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश के निर्यात पर लगाए गए काउंटर टैरिफ को तीन महीने के लिए टालने की मांग की है। ट्रंप प्रशासन ने बांग्‍लादेशी सामानों पर 37 प्रतिशत टैरि‍फ लगा दिया है, जबकि पहले यह औसतन 15 प्रतिशत था।

बांगलादेश का मुख्य निर्यात उत्पाद रेडीमेड गारमेंट्स (आरएमजी) है, जिसका बड़ा हिस्सा अमेरिका भेजा जाता है। बांग्लादेश का सालाना निर्यात अमेरिका को लगभग 8.4 अरब डॉलर का है, जिसमें मुख्य रूप से रेडीमेड गारमेंट्स शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित रेसिप्रोकल टैरिफ नीति के तहत दावा किया गया कि बांग्लादेश अमेरिकी उत्पादों पर 74 फीसदी टैरिफ लगाता है, जिसके जवाब में अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने इस दर में 50 प्रतिशत की छूट देते हुए बांग्लादेश के लिए 37 प्रतिशत टैरि‍फ लागू किया।

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इस बीच, सोमवार को जब वैश्विक शेयर बाजार गिरावट का सामना कर रहे थे, ट्रंप ने अपनी विवादास्पद टैरि‍फ नीतियों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के नेता पलटवार टैरि‍फ पर बातचीत करने के लिए तैयार हैं। जबसे अंतरिम सरकार ने अगस्त 2024 में सत्ता संभाली है, तब से बांग्‍लादेश की अर्थव्यवस्था गिरावट के दौर से गुजर रही है।

व्यापार क्षेत्र में संकट का सामना करना पड़ रहा है और कई व्यापारिक एवं औद्योगिक प्रतिष्ठान बंद हो गए हैं। राजनीतिक उथल-पुथल और वैश्विक खुदरा कंपनियों द्वारा वैकल्पिक साझेदारों की तलाश ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर डाला है। इसके कारण बांग्‍लादेशी उद्यमियों को कच्चे माल का आयात करने में मुश्किलें आ रही हैं।

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इसके साथ ही, गारमेंट फैक्ट्रियों के श्रमिकों द्वारा बकाए के भुगतान और खराब कार्य स्थितियों को लेकर विरोध और हड़तालें पूरे देश में फैल गई हैं। कई रिपोर्टों में यह सामने आया है कि श्रमिकों के लगातार विरोध प्रदर्शन के कारण कई फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं और कई श्रमिकों की जान भी गई है या वे गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

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देश के प्रमुख बांगला दैनिक प्रथम आलो ने रिपोर्ट दी है कि अधिकांश आर्थिक संकेतक, जैसे राजस्व संग्रह, महंगाई, बेरोज़गारी, निजी निवेश, पूंजी उपकरणों का आयात, पूंजी बाजार और विदेशी निवेश, अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं। ढाका स्थित सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग (सीपीडी) का कहना है कि देश को राजनीतिक और संस्थागत स्थिरता के बिना घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित नहीं किया जा सकता है।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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