बीएससी एग्रीकल्चर ग्रेजुएट ग्रेसी दुग्गा बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल: आधुनिक सूकरपालन से रच दी सफलता की नई कहानी, नेशनल लाइव स्टॉक मिशन से मिली 30 लाख रुपये की सब्सिडी, एक करोड़ से अधिक की परियोजना में 400 से ज्यादा सूकरों का आधुनिक फार्म

रायपुर, 22 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की एक युवा महिला ने यह साबित कर दिया है कि यदि शिक्षा, दृढ़ इच्छाशक्ति और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े स्तर का सफल व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के किंजोली गांव की रहने वाली बीएससी एग्रीकल्चर स्नातक ग्रेसी दुग्गा ने आधुनिक सूकरपालन के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल पेश की है, जो आज पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
ग्रेसी ने पशु चिकित्सा विभाग के तकनीकी सहयोग और भारत सरकार की नेशनल लाइव स्टॉक मिशन योजना के तहत मिली 30 लाख रुपये की सब्सिडी से एक करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपये की लागत वाली आधुनिक सूकरपालन परियोजना स्थापित की। वर्तमान में उनके फार्म में 400 से अधिक सूकर हैं और यह फार्म बस्तर क्षेत्र में आधुनिक पशुपालन का सफल मॉडल बन चुका है।

नौकरी छोड़ चुना स्वरोजगार का रास्ता
ग्रेसी दुग्गा ने वर्ष 2023 में उत्तराखंड के देहरादून से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा या नौकरी की राह चुनने के बजाय उन्होंने अपने ज्ञान का उपयोग कृषि एवं पशुपालन आधारित उद्यम शुरू करने में किया। उन्होंने देखा कि बस्तर क्षेत्र में सूकर के मांस की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि आधुनिक और व्यावसायिक स्तर पर सूकरपालन करने वाले उद्यमियों की संख्या बहुत कम है। इसी संभावना को पहचानते हुए उन्होंने सूकरपालन को अपना व्यवसाय बनाया।
सरकारी सहयोग से मिला बड़ा अवसर
आधुनिक फार्म स्थापित करने के लिए ग्रेसी को पशु चिकित्सा सेवाओं के संयुक्त संचालक कार्यालय से तकनीकी मार्गदर्शन मिला। विभाग ने परियोजना तैयार करने से लेकर वैज्ञानिक प्रबंधन और वित्तीय प्रक्रिया तक हर स्तर पर सहयोग किया। इसके बाद नेशनल लाइव स्टॉक मिशन के अंतर्गत उनकी 1.12 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत हुई।
अनुसूचित जनजाति वर्ग से पहली बार आवेदन करने पर उन्हें 30 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। ग्रेसी बताती हैं कि यदि यह सहायता नहीं मिलती तो वे केवल 20 से 25 सूकरों के साथ छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू कर पातीं। सरकारी सहयोग ने उन्हें आधुनिक अधोसंरचना और बड़े पैमाने पर व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया।
वैज्ञानिक तकनीक से मिली बड़ी सफलता
फार्म में तमिलनाडु से उन्नत नस्ल के सूकर लाए गए। पशुपालन विभाग के चिकित्सकों और कृषि वैज्ञानिकों की देखरेख में सभी पशुओं के टीकाकरण, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया। मई 2025 में 100 मादा और 10 नर सहित कुल 110 प्रजनन योग्य सूकरों से इस परियोजना की शुरुआत हुई थी। लगभग एक वर्ष की वैज्ञानिक देखभाल और बेहतर प्रबंधन के बाद जून 2026 तक फार्म में 202 वयस्क प्रजनन योग्य सूकर तथा करीब 206 पिगलेट तैयार हो गए। वर्तमान में फार्म में कुल 400 से अधिक सूकर मौजूद हैं।
पहली बिक्री में ही करीब चार लाख रुपये की आय
ग्रेसी दुग्गा के फार्म से अब उन्नत नस्ल के पिगलेट्स की व्यावसायिक बिक्री भी शुरू हो चुकी है। रायपुर सहित विभिन्न बाजारों में उनके फार्म से नियमित रूप से सूकरों की आपूर्ति की जा रही है।
हाल ही में उन्होंने 65 पिगलेट्स को 6 हजार रुपये प्रति पिगलेट की दर से बेचकर लगभग 3 लाख 90 हजार रुपये की आय अर्जित की। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर सूकरपालन को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।
युवाओं के लिए प्रेरणादायक मॉडल
ग्रेसी दुग्गा की सफलता यह संदेश देती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी आधुनिक कृषि एवं पशुपालन आधारित स्टार्टअप शुरू कर बेहतर आय अर्जित की जा सकती है। पशु चिकित्सा विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं के प्रभावी उपयोग और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के युवाओं के सामने स्वरोजगार का एक सफल मॉडल प्रस्तुत किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक से अधिक युवा इस तरह की योजनाओं का लाभ लेकर वैज्ञानिक पद्धति से पशुपालन अपनाएं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।



