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छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा

कुंवारपुर रेंज अफसर के तबादले बाद नई पोस्टिंग न होना क्या प्रभारी बैठाने की थी गणित, तबादले बाद भी काबिज हुआ रेंजर तो किसके मंसूबे पर फिर गया पानी…

कुंवारपुर रेंज अफसर के तबादले बाद नई पोस्टिंग न होना क्या प्रभारी बैठाने की थी गणित

तबादले बाद भी काबिज हुआ रेंजर तो
किसके मंसूबे पर फिर गया पानी

एमसीबी। क्या मान लिया जाए की यह सरकार जंगलों की संवेदनशीलता को बिलकुल खत्म कर देने की लगातार कोशिश में काम कर रही है। या फिर वन विभाग में सक्रिय उलट फेर कराने वाले दलालों की सेटिंग हावी है। आपको बता दें की अगस्त माह में जिस तरह थोक के भाव रेंज अफसरों का तबादला और नई पोस्टिंग हुई जिसमे कई रेंज के रेंजरों का तबादला तो हुआ पर उस जगह दूसरी या नई पोस्टिंग नहीं हुई इसी तरह मनेंद्रगढ़ वन मंडल अंतर्गत कुंवारपुर रेंज में भी हुआ। यहां के रेंजर का तबदला तो हुआ पर उस जगह किसी की पोस्टिंग नहीं हुई। अब सोचने वाली बात है की अगर उक्त रेंज को खाली रखा गया तो आखिर क्यों।क्या उक्त रेंज में प्रभारी बैठाने की कोशिश थी।आपको अवगत करा दें की जब दो स्टार प्रभारी रेंजर बैठाने की बात होती है तो मनेंद्रगढ़ वन मंडल का नाम पहले नंबर पर आता है। जहां विभाग व्यवस्था बनाने पर जोर देता है तो वहीं स्थानीय स्तर पर वन विभाग में सक्रिय दलाल या ऊंचे अफसर प्रभारियों के लिए अपने करीबी नेताओं से जी हुजूरी और चढ़ावे से लेकर अपने करतूत बाजों को कुर्सी पर बैठाने के लिए सिस्टम तक को बदलने में जुट जाते हैं। कयास लगाया जा सकता है की बार बार की तरह इस बार भी मनेंद्रगढ़ वन मंडल में सक्रिय किसी दलाल की ही कोशिश थी जो अब लगभग फेल होती दिख रही है।क्यू की पहले सिर्फ एक तरफ से पहुंच और सिफारिश काम कर रही थी। पर अब जनाब वर्तमान रेंजर भी कोर्ट से स्थगन लाकर जैसे को तैसा वाला जोरदार करारा जवाब दे दिया है।और सिस्टम शासन के तबादला को भी ठेंगा दिखा दिया है। हालांकि कोर्ट से स्थगन बाद भी उक्त पद पर बैठे रेंजर पर विभागीय दबाव बना था। पर इससे निपटने का जुगाड़ भी जनाब रेंजर साहब आखिर ढूंढ ही लिए। जिसकी वजह से माल पानी देकर रेंज रिक्त रखवाने वाले साहब की जमकर फजीहत हो रही है।जिसे आम बोलचाल की भाषा में कहें तो धन और धर्म दोनो पर बन पड़ी है। हालांकि हम इस बात की पुष्टि नहीं करते पर सूत्रों से मिली जानकारी कहती है की मनेंद्रगढ़ वन मंडल में प्रभारी रेंजर पर दलाली चरम पर है जिसके एक अहम सूत्रधार विभाग के अफसर भी हैं।जो मोटी रकम की पेशगी ऊपर तक पहुंचाकर अपने हितैसी दो स्टार को पदस्थ कराते हैं। हवाले से मिली जानकारी के मद्देनजर यह भी कह सकते हैं की रेंजर कुंवारपुर जिनका तबादला हो चुका था पर विभाग के ही कुछ लोगों के मशवरे की बदौलत जनाब रेंजर साहब कुंडली मारकर पुनः बैठ गए।जिसके बाद अब उस कुर्सी का सेटिंग बाज़ दावेदार खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है।बहरहाल विभाग में स्थानीय स्तर पर तबादला और पोस्टिंग पर विभागीय मिलीभगत वन विभाग या वनीय दायित्वों की संवेदनशीलता के साथ बड़ा खेलवाड़ है जिस पर जिम्मेदार अधिकारियों के दखल की जरूरत है।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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