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सीनियर सिटीजन और पेंशनर्स के लिए आयोजित हुआ विशेष ‘सायबर जागृति’ कार्यक्रम
पुलिस ने बताए साइबर ठगी से बचने के उपाय, OTP-पिन और बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करने की दी समझाइश, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वालों से रहें सावधान, डरने के बजाय तत्काल पुलिस को दें सूचना

जांजगीर-चांपा। जिले में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और आम नागरिकों को साइबर ठगी के नए-नए तरीकों से जागरूक करने के उद्देश्य से जांजगीर-चांपा पुलिस द्वारा लगातार ‘सायबर जागृति अभियान’ चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत जिले के सीनियर सिटीजन, पेंशनर्स, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी-कर्मचारी एवं विभिन्न विभागों से सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
दिनांक 03 सितंबर 2026 को जिला पंचायत के ऑडिटोरियम हॉल, जांजगीर में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक एवं पेंशनर्स शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन पुलिस अधीक्षक श्री विजय कुमार पाण्डेय IPS के निर्देशन में तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जांजगीर डॉ. यूलैंडन यार्क के नेतृत्व में किया गया।
फर्जी अधिकारी बनकर ठगी करने वालों से रहें सतर्क
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने वरिष्ठ नागरिकों को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। बताया गया कि साइबर ठग आए दिन ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। ठग स्वयं को पुलिस अधिकारी, बैंक अधिकारी, न्यायालय, सरकारी विभाग अथवा अन्य प्रतिष्ठित संस्था का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते हैं।
पुलिस ने अपील की कि किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन करने पर घबराएं नहीं और उसकी बातों में आकर कोई आर्थिक लेनदेन न करें। OTP, ATM PIN, CVV, पासवर्ड, बैंक खाता संबंधी जानकारी अथवा अन्य गोपनीय जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करें।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी से रहें सावधान
पुलिस अधिकारियों ने वरिष्ठ नागरिकों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर की जाने वाली साइबर ठगी के प्रति विशेष रूप से जागरूक किया। साइबर ठग फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से स्वयं को पुलिस, CBI, ED, नारकोटिक्स अथवा न्यायालय का अधिकारी बताकर पीड़ित को किसी अपराध में फंसने का डर दिखाते हैं। इसके बाद गिरफ्तारी का भय दिखाकर पैसे की मांग की जाती है।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस तरह के फोन आने पर डरने या दबाव में आने की जरूरत नहीं है। किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा इस प्रकार फोन पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर बैंक खाते में रकम जमा कराने की मांग नहीं की जाती। ऐसे मामलों में तत्काल फोन काटकर पुलिस को सूचना देने की अपील की गई।
WhatsApp और SMS से आने वाली APK फाइल से रहें सावधान
कार्यक्रम में APK फाइल और संदिग्ध लिंक से होने वाली साइबर ठगी के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। पुलिस ने बताया कि साइबर ठग WhatsApp, SMS अथवा सोशल मीडिया के माध्यम से अनजान नंबरों से APK फाइल या संदिग्ध लिंक भेज सकते हैं।
ऐसी फाइल डाउनलोड अथवा इंस्टॉल करने पर मोबाइल का डेटा, OTP और बैंकिंग संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच सकती है। इसलिए अनजान नंबर से आई किसी भी APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें तथा संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें शिकायत
पुलिस ने वरिष्ठ नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि साइबर अपराध से बचने के लिए जागरूकता और सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण है। किसी अनजान व्यक्ति पर विश्वास कर अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा न करें। सोशल मीडिया पर प्राप्त संदिग्ध लिंक, ऑफर, लॉटरी, नौकरी, निवेश अथवा पुरस्कार संबंधी संदेशों की सत्यता जांचे बिना कोई कार्रवाई न करें।
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हो जाती है तो वह बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराए, ताकि ठगी गई रकम को रोकने और आरोपियों तक पहुंचने की कार्रवाई समय रहते की जा सके।
जांजगीर-चांपा पुलिस ने कहा कि ‘सायबर जागृति अभियान’ के माध्यम से जिले के विभिन्न वर्गों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया जा रहा है। वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनर्स को विशेष रूप से जागरूक करने का उद्देश्य उन्हें साइबर अपराधियों के झांसे से सुरक्षित रखना और डिजिटल लेनदेन के दौरान आवश्यक सावधानियों के प्रति सजग करना है।



