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रक्षाबंधन विशेष: बड़े भाई ने छोटे भाई को दिया जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा, किडनी दान कर बचाई जान
भाई के प्रति प्रेम और त्याग की अनोखी मिसाल, शिक्षक सेवक राम कश्यप ने छोटे भाई राजेश को दी अपनी किडनी

जांजगीर-चांपा। रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है, लेकिन ग्राम सेमरिया, बिर्रा तहसील बम्हनीडीह निवासी श्री सेवक राम कश्यप (शिक्षक) ने भाई के प्रति त्याग और समर्पण की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। उन्होंने अपने छोटे भाई राजेश कश्यप की जिंदगी बचाने के लिए अपनी एक किडनी दान कर दी। बड़े भाई के इस फैसले ने न केवल परिवार को भावुक कर दिया, बल्कि गांव और आसपास के क्षेत्र में भी उनके त्याग की खूब प्रशंसा हो रही है।
बताया गया कि छोटे भाई राजेश कश्यप की तबीयत लंबे समय से खराब चल रही थी और चिकित्सकीय जांच के बाद उनके लिए किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता सामने आई। परिवार के सामने यह बेहद कठिन परिस्थिति थी। ऐसे समय में बड़े भाई सेवक राम कश्यप ने बिना अपने भविष्य की चिंता किए छोटे भाई की जिंदगी बचाने के लिए अपनी किडनी दान करने का निर्णय लिया।
सेवक राम का कहना था कि भाई की जिंदगी से बढ़कर उनके लिए कुछ भी नहीं है। अपने भाई को जीवन देने के लिए उन्होंने अपने शरीर का अनमोल अंग दान करने का साहसिक फैसला लिया। चिकित्सकीय प्रक्रिया और आवश्यक जांच के बाद उन्होंने अपनी किडनी छोटे भाई राजेश को दान की। किडनी प्रत्यारोपण के बाद राजेश को नया जीवन मिला और परिवार में एक बार फिर खुशियां लौट आईं।
रिश्ते से बढ़कर त्याग की कहानी
सेवक राम कश्यप का यह कदम केवल किडनी दान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भाई-भाई के बीच प्रेम, विश्वास और त्याग की गहरी भावना को दर्शाता है। आज जब रक्षाबंधन पर भाई-बहन एक-दूसरे की रक्षा और सुख-दुख में साथ निभाने का संकल्प लेते हैं, वहीं सेवक राम ने अपने छोटे भाई के लिए वास्तव में अपने जीवन का एक अनमोल हिस्सा देकर उस रिश्ते की सार्थकता साबित की है।
परिवार के सदस्यों के अनुसार, बड़े भाई के इस त्याग से पूरा परिवार भावुक है। सेवक राम के इस निर्णय को परिवार की ओर से भी भरपूर प्यार और सम्मान मिला। वहीं गांव के लोगों को जब इस घटना की जानकारी हुई तो उन्होंने भी सेवक राम की जमकर सराहना की।
गांव में बनी चर्चा, लोग दे रहे उदाहरण
ग्राम सेमरिया और आसपास के क्षेत्र में सेवक राम कश्यप के इस त्याग की चर्चा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि भाई के लिए अपनी किडनी दान करना आसान निर्णय नहीं होता, लेकिन सेवक राम ने बिना किसी स्वार्थ के अपने छोटे भाई की जिंदगी को प्राथमिकता दी। उनका यह त्याग समाज के लिए भी प्रेरणादायी है।
रक्षाबंधन के पावन अवसर पर सामने आई यह कहानी बताती है कि भाई का रिश्ता केवल राखी बांधने और रक्षा का वादा करने तक सीमित नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर अपने जीवन का सबसे अनमोल हिस्सा तक न्योछावर करने का नाम है। सेवक राम कश्यप ने अपने छोटे भाई को किडनी दान कर भाईचारे, प्रेम और त्याग की ऐसी मिसाल कायम की है, जो रक्षाबंधन की भावना को और भी सार्थक बनाती है।



