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स्कूल में अंधविश्वास का आरोप: सोने की बाली खोने पर बच्चों से दिलाई कसम, शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच

जांजगीर-चांपा। जिले के बलौदा विकासखंड के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां पदस्थ एक शिक्षिका पर छात्रों के साथ कथित रूप से अंधविश्वास से जुड़ा कृत्य करने का आरोप लगा है। आरोप है कि स्कूल परिसर में सोने की बाली खो जाने के बाद शिक्षिका ने 30 से अधिक बच्चों के हाथों में नारियल, चावल और मौली रखवाकर उनसे कसम दिलाई तथा गहना नहीं लौटाने पर अनहोनी होने जैसी बातें कहीं। घटना के बाद कई बच्चों के डरने की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत शिक्षा विभाग और पुलिस से करते हुए संबंधित शिक्षिका पर कार्रवाई की मांग की है।

मामला बलौदा विकासखंड के ग्राम पंचायत डोंगरी-काठापाली स्थित शासकीय प्राथमिक शाला काठापाली का है। आरोप है कि शिक्षिका स्कूल पहुंचने के बाद अपनी सोने की बाली खोने की बात कहने लगीं। इसके बाद बच्चों के हाथों में लाल कपड़े में बंधा नारियल, चावल और मौली रखवाकर उनसे यह कहलवाया गया कि यदि किसी को बाली मिली हो तो वह वापस कर दे। साथ ही कथित तौर पर यह भी कहा गया कि जिसने बाली रख ली है और वापस नहीं करेगा, उसके साथ अनहोनी हो सकती है या उसकी तबीयत खराब हो सकती है।

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बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद कई बच्चे भयभीत हो गए। घर पहुंचने पर उन्होंने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। इसके बाद अभिभावक और ग्रामीण स्कूल पहुंचे तथा प्रधान पाठिका से शिकायत की। ग्रामीणों का आरोप है कि शुरुआत में संबंधित शिक्षिका ने घटना से इनकार किया, लेकिन बच्चों ने स्कूल की अलमारी में रखे नारियल और चावल दिखाकर अपनी बात दोहराई।

प्रधान पाठिका ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी ग्रामीणों की शिकायत के बाद मिली। उन्होंने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह गंभीर मामला है और इससे बच्चों के मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

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ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि स्कूल बच्चों में वैज्ञानिक सोच, तर्क और नैतिक मूल्यों का विकास करने का स्थान है, न कि भय और अंधविश्वास फैलाने का। उन्होंने संबंधित शिक्षिका के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की मांग की है।

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विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच कराने की बात कही है। उनका कहना है कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित शिक्षिका के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वहीं ग्रामीणों ने मामले की शिकायत पुलिस से भी की है।

फिलहाल शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के मानसिक विकास से जुड़ा गंभीर विषय माना जाएगा।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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