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PMAY Controversy in Jagdalpur: पीएम आवास पर छिड़ा सियासी घमासान; 1600 आवेदनों में से 1200 रिजेक्ट होने का आरोप

जगदलपुर (बस्तर)। केंद्र और राज्य सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (PMAY), जिसका उद्देश्य हर गरीब को सिर पर पक्की छत मुहैया कराना है, अब जगदलपुर नगर निगम में विवादों और तीखे सवालों के घेरे में आ गई है। बस्तर संभाग के इस सबसे बड़े नगर निगम में आवास आवंटन और आवेदनों के रिजेक्शन (निरस्तीकरण) के आंकड़ों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी घमासान छिड़ गया है।

एक तरफ जहां नगर निगम प्रशासन कागजों पर हजारों मकानों के निर्माण और स्वीकृति का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष का आरोप है कि कड़े नियमों और दस्तावेजी भूलभुलैया के कारण शहर के 70% से अधिक गरीबों के आवेदन ठंडे बस्ते में डाल दिए गए हैं।

दावों का टकराव: निगम बनाम विपक्ष

जगदलपुर नगर निगम के भीतर पीएम आवास को लेकर दावों और आरोपों की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं:

  • नगर निगम का दावा: निगम प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, अब तक कुल 2,036 आवेदनों को स्वीकृति दी जा चुकी है। इनमें से 1,855 मकानों पर जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि योजना पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ रही है।
  • विपक्ष का पलटवार: विपक्ष ने इन आंकड़ों को पूरी तरह भ्रामक बताते हुए कहा है कि हकीकत में करीब 1,600 गरीब परिवारों ने पक्के मकान की उम्मीद में आवेदन किए थे। लेकिन निगम की कड़ी स्क्रूटनी और लापरवाही के चलते लगभग 1,200 आवेदनों को विभिन्न तकनीकी कारण बताकर या तो पूरी तरह रिजेक्ट कर दिया गया है या फिर होल्ड (लंघित) पर डाल दिया गया है।
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कागजी शर्तों की भूलभुलैया बनी गरीबों की दुश्मन

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ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, कई ऐसे जरूरतमंद परिवार हैं जो झुग्गियों या किराए के टूटे-फूटे मकानों में रह रहे हैं, लेकिन सरकारी गाइडलाइन की जटिल शर्तें उनके लिए ‘चाइना वॉल’ साबित हो रही हैं। आवेदकों के सामने मुख्य रूप से ये 5 दस्तावेज और शर्तें सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरी हैं:

1. अगस्त 2015 से पूर्व का स्थानीय निवास: योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को अगस्त 2015 से पहले से संबंधित शहरी क्षेत्र में रहने का पुख्ता प्रमाण देना अनिवार्य है।

2. मतदाता पहचान पत्र (Voter ID): स्थानीय वार्ड की मतदाता सूची में नाम और पुराना वोटर कार्ड होना जरूरी है।

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3. स्थानीय निवास प्रमाण पत्र: सक्षम अधिकारी द्वारा जारी छत्तीसगढ़ का मूल निवास प्रमाण पत्र।

4. जनगणना सूची (Socio-Economic Survey): वर्ष 2011 की आर्थिक-सामाजिक जाति जनगणना सूची में परिवार का नाम दर्ज होना।

5. आय का मापदंड: परिवार की वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम होने का वैध शपथ पत्र या प्रमाण पत्र।

जगदलपुर नगर निगम: पीएम आवास की वर्तमान स्थिति (आधिकारिक आंकड़े)

धरमपुरा और देवकी क्षेत्र में मकान तैयार, फिर भी हितग्राही लाचार

शहरी क्षेत्र के धरमपुरा और देवकी वार्डों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बहुमंजिला इमारतों वाले ब्लॉक बनकर तैयार हो चुके हैं। इसके बावजूद कई ऐसे पात्र परिवार हैं जो हर हफ्ते नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं ताकि उन्हें आवंटन पत्र मिल सके।

अंशदान की भारी रकम का बोझ:

इस योजना में एक और व्यावहारिक दिक्कत यह सामने आ रही है कि केंद्र और राज्य सरकार की भारी-भरकम सब्सिडी के बाद भी एक फ्लैट या मकान की कुल लागत करीब 3 लाख रुपये बैठती है। इसमें से हितग्राही को अपने हिस्से का 10 प्रतिशत अंशदान यानी लगभग 38 हजार रुपये अग्रिम जमा करना होता है। जगदलपुर के दिहाड़ी मजदूरों और अत्यंत गरीब परिवारों के लिए एकमुश्त 38,000 रुपये का इंतजाम करना भी एक पहाड़ तोड़ने जैसा साबित हो रहा है।

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पारदर्शिता के नाम पर उलझा तंत्र

इसमें कोई दो राय नहीं है कि सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सख्त दस्तावेजी प्रक्रिया जरूरी है, लेकिन जब यह प्रक्रिया इतनी जटिल हो जाए कि वास्तविक हकदार ही रेस से बाहर हो जाएं, तो योजना के मूल उद्देश्य पर सवाल उठना लाजिमी है। वर्तमान में नगर निगम द्वारा दावे-आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया चलाने की बात कही जा रही है।

अब देखना होगा कि दावों-प्रतिदावों के इस खेल के बीच, बस्तर के इन बेघर और जरूरतमंद परिवारों की फाइलों से ‘रिजेक्ट’ का ठप्पा कब हटता है और उनके अपने आशियाने का सपना कब सच होता है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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