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KORBA BREAKING : चार मासूम आंखों में उम्मीद, व्यवस्था से इंसाफ की आसमां-बाप के साए से वंचित बहनें पांच साल से राहत की राह में…

कोरबा, 23फरवरी। सीतामढ़ी की चार बहनों की कहानी केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि व्यवस्था की धीमी रफ्तार का आईना भी है। बचपन में ही पिता का साया उठ गया था। मां कलिन्द्री यादव ने मजदूरी कर बेटियों सिम्मी, स्नेहा, मुस्कान और आस्था को संभालने की पूरी कोशिश की। लेकिन 1 अप्रैल 2018 को आए तेज आंधी-तूफान ने वह सहारा भी छीन लिया। कच्चे घर का छज्जा गिरा और उसके नीचे दबकर मां की मौत हो गई। उस दिन के बाद से इन चारों बहनों का बचपन जैसे थम गया।

मां के जाने के बाद चारों नाबालिग बच्चियां पूरी तरह अनाथ हो गईं। घर में कमाने वाला कोई नहीं, सहारा देने वाला कोई नहीं। स्कूल की किताबों से ज्यादा चिंता अब दो वक्त की रोटी की हो गई है। रिश्तेदारों और पड़ोसियों के सहारे जैसे-तैसे दिन कट रहे हैं, लेकिन भविष्य अनिश्चितताओं से घिरा है।

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पीड़ित बहनों का कहना है कि शासन द्वारा दी जाने वाली आपदा राहत राशि के लिए उन्होंने कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई, मगर वर्षों तक मामला फाइलों में उलझा रहा। समय बीतता गया, पर मदद जमीन पर नहीं उतरी। पांच साल बाद भी वे उसी इंतजार में हैं, जिसमें हर दिन उम्मीद और निराशा साथ-साथ चलती है।

हाल ही में चारों बहनों ने कलेक्टर कुणाल दुदावत से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। फाइल फिर से खुली है, लेकिन इन मासूमों की नजरें अब सिर्फ कागजी कार्रवाई पर नहीं, वास्तविक सहायता पर टिकी हैं।

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यह कहानी केवल राहत राशि की नहीं, बल्कि उस संवेदना की है जिसकी अपेक्षा हर अनाथ बच्चे को समाज और शासन से होती है। अब देखना है कि यह उम्मीद कब हकीकत में बदलती है।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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