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President Donald Trump : WHO से अलग हुआ अमेरिका, ट्रंप अब तक करीब 70 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से तोड़ चुके हैं नाता

वॉशिंगटन: अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से औपचारिक रूप से अलग होने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। संघीय अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दिन इस 78 साल पुरानी सदस्यता को समाप्त करने का ऐलान किया था, जो अब पूरी तरह लागू हो गया है। इसके साथ ही ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में अब तक लगभग 70 अंतरराष्ट्रीय संगठनों और वैश्विक समझौतों से अमेरिका को बाहर कर चुके हैं।

स्वास्थ्य सुरक्षा पर पड़ सकता है असर

WHO के मुताबिक अमेरिका पर अब भी संगठन के 130 मिलियन डॉलर से अधिक बकाया हैं। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि कई अहम मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं, जिनमें अन्य देशों से मिलने वाला स्वास्थ्य डेटा भी शामिल है, जिससे किसी नई महामारी की शुरुआती चेतावनी मिल सकती थी।

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विशेषज्ञों का कहना है कि WHO से अलग होने का असर वैश्विक स्तर पर बीमारियों से निपटने की क्षमता पर पड़ेगा। इससे अमेरिकी वैज्ञानिकों और दवा कंपनियों के लिए नई दवाएं और टीके विकसित करना भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के पब्लिक हेल्थ लॉ विशेषज्ञ लॉरेंस गोस्टिन ने इसे “अपने जीवनकाल का सबसे विनाशकारी राष्ट्रपति फैसला” करार दिया है।

WHO को अमेरिका से मिलती थी बड़ी फंडिंग

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WHO संयुक्त राष्ट्र की विशेष स्वास्थ्य एजेंसी है, जो एमपॉक्स, इबोला और पोलियो जैसी बीमारियों से निपटने के वैश्विक प्रयासों का समन्वय करती है। यह गरीब देशों को तकनीकी सहायता, वैक्सीन और दवाओं के वितरण में मदद करती है तथा मानसिक स्वास्थ्य और कैंसर समेत सैकड़ों बीमारियों के लिए दिशा-निर्देश तय करती है।

अमेरिका WHO की स्थापना में अग्रणी भूमिका में रहा है और लंबे समय तक इसका सबसे बड़ा दानदाता भी रहा। अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अमेरिका हर साल औसतन 111 मिलियन डॉलर सदस्य शुल्क और लगभग 570 मिलियन डॉलर स्वैच्छिक योगदान देता रहा है।

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66 से अधिक संगठनों से अमेरिका बाहर

WHO से अलगाव के साथ ही ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका को 66 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकालने का फैसला किया है। इनमें 31 संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी और 35 गैर-यूएन संस्थाएं शामिल हैं।

व्हाइट हाउस का कहना है कि इनमें से कई संगठन जलवायु, श्रम, प्रवासन और विविधता जैसे मुद्दों पर काम कर रहे थे, जिन्हें प्रशासन ने अमेरिका के हितों के विपरीत बताया है।

संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी जिन संस्थाओं से अमेरिका अलग हो रहा है, उनमें आर्थिक एवं सामाजिक मामलों का विभाग, UN Women, UNFCCC, अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र, पीसबिल्डिंग कमीशन, UN Population Fund, UN Water और UN University जैसी प्रमुख इकाइयां शामिल हैं। वहीं गैर-यूएन संगठनों में IPCC, इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी, इंटरनेशनल सोलर अलायंस, IUCN और माइग्रेशन से जुड़े वैश्विक मंच प्रमुख हैं।

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पेरिस जलवायु समझौते से भी दूरी

ट्रंप ने जनवरी 2025 में सत्ता में लौटने के बाद अमेरिका को दूसरी बार पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकालने की घोषणा की थी। यह फैसला 27 जनवरी 2026 से लागू होगा, जिसके बाद अमेरिका कार्बन कटौती से जुड़े कानूनी दायित्वों से मुक्त हो जाएगा। इसके साथ ही प्रशासन ने UNFCCC से बाहर निकलने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिस पर कानूनी चुनौती की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और शरणार्थी एजेंसी UNHCR का सदस्य बना रहेगा, क्योंकि इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय हितों के लिए जरूरी माना गया है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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