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जारी है खाद की कालाबाजारी, निजी दुकानों में 4 गुना ज्यादा दाम पर बेची जा रही है और सोसायटी में नहीं मिल रही है खाद, अफसर कह रहे नहीं है खाद की कोई कमी..!

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ में उर्वरक खाद की कालाबाजारी थमने का नाम नहीं ले रही है। किसानों को शासकीय उचित मूल्य दुकानों सोसायटी में खाद नहीं मिल रही है और खुले बाजार में चार गुना ज्यादा दाम पर खाद बेची जा रही है। जांजगीर-चांपा से सामने आई इस हकीकत ने कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार एक तरफ किसानों को राहत पहुंचाने और योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जांजगीर-चांपा जिले में खाद की कालाबाजारी खुलेआम जारी है। किसान शासकीय उचित मूल्य दुकानों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जहां न तो उन्हें खाद मिल रही है और न ही मिलने का आश्वासन। जबकि बाजार में यही खाद चार गुना अधिक दाम पर बेची जा रही है।
इस संबंध में जब मीडिया ने कृषि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल पूछा तो उन्होंने चुप्पी साध ली। मामला तूल पकड़ने पर महज एक-दो व्यापारियों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति की गई, जबकि अवैध बिक्री अब भी धड़ल्ले से जारी है। किसानों का कहना है कि उन्हें सरकार द्वारा तय दर पर खाद मिलना चाहिए, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते वे शोषण का शिकार हो रहे हैं।
जांजगीर जिले के नवागढ़ ब्लाक के खोखरा गांव से एक किसान ने बताया कि गांव में राठौर कृषि केंद्र एवं थवाईत दुकान में यूरिया 1200, डीएपी 2000, 2100 में बेच रहें हैं। पामगढ़ ब्लॉक के छोटे से गांव पनगांव के किसान शंभू दास ने बताया कि उचित मूल्य की दुकानों में खाद मिल ही नहीं रही है। कभी खाद का स्टॉक आता भी है तो वह मिनटों में खत्म हो जाता है, इधर खाद यूरिया, पोटाश, डीएपी का छिड़काव नहीं होने उनकी धान की फसल बर्बाद हो रही है। अन्य किसानों ने भी बताया कि उन्हें खाद नहीं मिल रही है और निजी कृषि प्रतिष्ठानों में खाद का स्टॉक उपलब्ध है और कई गुना ज्यादा कीमत पर बेची जा रही है। छत्तीसगढ़ शासन का कृषि विभाग खाद को लेकर बड़े दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसान अब भी खाद के लिए भटकने को मजबूर हैं। जांजगीर-चांपा में खुलेआम जारी कालाबाजारी ने सरकार और कृषि विभाग दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



