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सक्ती में अवैध खनिज उत्खनन पर कसा शिकंजा: करही में तीन चैन माउंटेन मशीनें जब्त, खनिज अधिनियम के तहत मामला दर्ज, विभाग की कार्यवाही या खानापूर्ति?

सक्ती जिले में लगातार मिल रही अवैध खनिज उत्खनन की शिकायतों पर अब प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। कलेक्टर अमृत विकास टोपनो के सख्त निर्देश के बाद जिला खनिज विभाग द्वारा ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में जिला खनिज अधिकारी के.के. बंजारे के नेतृत्व में गठित उड़नदस्ता टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करही क्षेत्र में अवैध रूप से रेत का उत्खनन कर रही तीन चैन माउंटेन मशीनों को मौके पर जब्त कर लिया।

जानकारी के अनुसार, करही में अवैध उत्खनन की शिकायत कई दिनों से खनिज विभाग को मिल रही थी। इस बीच अवैध खनन की सूचना मिलने पर खनिज विभाग की उड़नदस्ता टीम तत्काल मौके पर पहुंची, जहां पाया गया कि तीन चैन माउंटेन मशीनों के माध्यम से बिना अनुमति के रेत उत्खनन किया जा रहा है। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मशीनों को जब्त कर खनिज अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।

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जिले में खनिज विभाग की इस सक्रियता से अवैध उत्खनन करने वालों में हड़कंप मच गया है। वहीं, ग्रामीणों ने भी प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रहे अवैध उत्खनन से न केवल सरकार के राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी क्षति हो रही है। इसके अलावा, इससे अवैध उत्खनन करने वालों के हौसले बुलंद होते जा रहे थे।

कार्यवाही या महज खानापूर्ति?
करही में अवैध रेत उत्खनन पर जिला प्रशासन की यह कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई एक खानापूर्ति बनकर रह जाएगी, या खनिज विभाग आगे भी लगातार और प्रभावी कार्रवाई करता रहेगा?

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क्षेत्रीय स्तर पर लंबे समय से यह देखा जा रहा है कि अधिकांश मामलों में विभाग की कार्यवाही एक दिन की औपचारिकता बनकर रह जाती है। जैसे ही कार्रवाई होती है, कुछ दिन तक गतिविधियां थम जाती हैं, लेकिन फिर वही पुराना सिलसिला शुरू हो जाता है, मशीनें फिर घाटों पर लौटती हैं, अवैध खनन फिर तेज हो जाता है, और सरकारी राजस्व का नुकसान भी जारी रहता है।

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इस स्थिति में जरूरी है कि जिला खनिज विभाग केवल एकमुश्त कार्रवाई कर ‘चेकलिस्ट’ पूरी करने का काम न करे, बल्कि उन रेत घाटों की निरंतर निगरानी और नियंत्रण प्रणाली तैयार की जाए। इसके साथ ही खनिज विभाग को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की सहायता से एक सूचना तंत्र तैयार हो, जिससे किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी समय रहते मिले और तत्काल कार्रवाई हो सके।

अगर खनिज विभाग सच में प्रदेश के खनिज संसाधनों की रक्षा और जनहित को प्राथमिकता देना चाहता है, तो उसे दिखावटी कार्यवाहियों से ऊपर उठकर सतत, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुसज्जित रणनीति अपनानी होगी। वरना जनता के मन में यह धारणा गहराती जाएगी कि कार्रवाई महज खानापूर्ति है और अवैध खनन माफियाओं के हौसले और बुलंद होते रहेंगे।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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