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10 हजार विद्यार्थी, 793 शिक्षक एवं 669 पालकों ने एक साथ किया साझा पठन, साझा पठन में दिखा बच्चों का उत्साह – बम्हनीडीह बीईओ का अनूठा पहल

जांजगीर-चांपा। विकासखंड शिक्षा अधिकारी बसंत चतुर्वेदी, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी रत्ना थवाईत, बीआरसीसी हिरेंद्र बेहार के ने बताया कि विकासखंड बम्हनीडीह के विभिन्न स्कूलों में 7 सितंबर को आयोजित साझा पठन कार्यक्रम में बच्चों का अलग ही उत्साह देखने को मिला। यह आयोजन केवल एक इवेंट बनकर नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे छिपे उद्देश्य और उपयोगिता को शिक्षकों ने समझते हुए इसे पूरे उत्साह के साथ अपनाया।
वास्तव में साझा पठन का मूल उद्देश्य निम्न पठन स्तर वाले बच्चों के पठन कौशल और पठन स्तर में सुधार करना है। आयोजन के दौरान यह उद्देश्य काफी हद तक व्यवहार में दिखाई भी दिया।
 आयोजन की प्रमुख झलकियाँ
 1. उच्च पठन स्तर वाले बच्चों में आत्मविश्वास
उच्च पठन स्तर वाले बच्चे पूरे आत्मविश्वास के साथ पढ़ते नजर आए और अन्य बच्चों के लिए सहयोगी की भूमिका निभाते दिखे।
 2. निम्न पठन स्तर के बच्चों में सीखने की ललक
निम्न पठन स्तर वाले बच्चे उच्च पठन स्तर वाले बच्चों के साथ पढ़ने का प्रयास करते नजर आए। उनमें पढ़ने के प्रति रुचि और उत्साह स्पष्ट दिखाई दिया।
 3. शिक्षक और बच्चों के बीच बढ़ी आत्मीयता
जब शिक्षक बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर पठन गतिविधि में शामिल हुए तो बच्चों में आत्मीयता और अपनत्व का भाव दिखाई दिया। शिक्षक और बच्चे एक साथ सीखने की प्रक्रिया में सहभागी बने।
 
 4. सभी बच्चे दिखे सक्रिय
सामान्य कक्षा की अपेक्षा साझा पठन के दौरान अधिक संख्या में बच्चे सक्रिय नजर आए। पढ़ने में झिझकने वाले बच्चे भी गतिविधि में भाग लेते दिखाई दिए।
 5. शिक्षण में नए साधनों का प्रयोग
किसी शिक्षक ने बिग बुक, किसी ने कहानी की पुस्तक, तो किसी ने प्रोजेक्टर का उपयोग किया। इससे यह देखने को मिला कि शिक्षक पारंपरिक तरीके से आगे बढ़कर उपलब्ध संसाधनों का रचनात्मक उपयोग कर रहे हैं।
 6. पढ़ने की झिझक हुई दूर
सामान्य कक्षा में पठन को लेकर झिझकने वाले कई बच्चे साझा पठन के दौरान सक्रिय दिखाई दिए। समूह में पढ़ने के कारण उनमें आत्मविश्वास बढ़ता नजर आया।
 
 7. बच्चों ने एक-दूसरे का सहयोग किया
साझा पठन के दौरान बच्चे एक-दूसरे को शब्द पढ़ने, समझने और आगे बढ़ने में सहयोग करते नजर आए। इससे सहयोगात्मक अधिगम का वातावरण बना।
 8. निश्चित समय में आयोजन से मिली सफलता
एक निश्चित समय निर्धारित कर कार्यक्रम आयोजित करने से शिक्षक और बच्चे दोनों मानसिक रूप से तैयार रहे और आयोजन व्यवस्थित एवं प्रभावी रहा।
 एक दिन का आयोजन नहीं, निरंतर अभ्यास बने साझा पठन
साझा पठन के दौरान मिले अनुभवों से यह बात सामने आई कि इसे केवल एक दिन का आयोजन न मानकर कक्षा की नियमित गतिविधि का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
कुछ शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि साझा पठन यदि प्रतिदिन कक्षा में कराया जाए तो बच्चों के पठन कौशल के विकास में निश्चित रूप से मदद मिलेगी। विशेष रूप से निम्न पठन स्तर वाले बच्चों को नियमित अभ्यास और साथियों के सहयोग से बेहतर अवसर मिल सकता है।
साथ ही शिक्षकों के बीच यह भी सुझाव सामने आया कि सभी शिक्षक एक-दूसरे के विद्यालयों में हुए साझा पठन के वीडियो देखें और जो गतिविधि उन्हें बेहतर एवं उपयोगी लगे, उसे अपने विद्यालय में अपनाएँ। इससे अच्छे प्रयासों का आदान-प्रदान होगा और साझा पठन की गतिविधियाँ लगातार बेहतर होती जाएँगी।
 निष्कर्ष
7 सितंबर का साझा पठन कार्यक्रम यह संदेश दे गया कि पठन केवल किताब पढ़ने की गतिविधि नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, सहयोग और सीखने की आदत विकसित करने का माध्यम भी है। यदि इसे निरंतरता के साथ कक्षा-कक्ष की नियमित प्रक्रिया बनाया जाए, तो बच्चों के पठन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
साझा पठन एक दिन का आयोजन नहीं, बच्चों के बेहतर पठन की निरंतर यात्रा है।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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