बैरिस्टर के नाम पर मलाई चाटने व दुकानदारी चमकाने का खेल जारी, स्मृति समारोह को अकादमी अध्यक्ष व सेवानिवृत्त आयुर्वेद अफसर की प्रेत बाधा से मुक्त करने की जरूरत…

बैरिस्टर के नाम पर मलाई चाटने व दुकानदारी चमकाने का खेल जारी
स्मृति समारोह को अकादमी अध्यक्ष व सेवानिवृत्त आयुर्वेद अफसर की प्रेत बाधा से मुक्त करने की जरूरत
जांजगीर-चांपा। देश के संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने और उससे पहले बिलासपुर अंचल सहित समूचे छत्तीसगढ़ में स्वाधीनता संग्राम की अलख प्रज्वलित करने वाले बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल के नाम पर आयोजित होने वाला स्मृति समारोह तमाशा बनकर रह गया है। संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा कराए गए वर्ष 2023 के स्मृति समारोह में जिले तो क्या शहर की जनता भी जुड़ नहीं पाई। आयोजन का हेतु कोसों दूर रह गया है। अब किसी तरह प्रशासन इस कार्यक्रम को निपटाना चाहता है और कर्मठ लोगों को निपाटने के लिए इस आयोजन से जुड़े मठाधीशों ने इसे अपनी दुकानदारी चमकने का जरिया बना लिया है। वर्षों से शासकीय खर्चे में होने वाले बैरिस्टर आयोजन स्मृति समारोह में कुंडली मारकर बैठे लोग न तो इस आयोजन को नवीनता दे पा रहे हैं और ना ही बैरिस्टर साहब के व्यक्तित्व,कृतित्व और उनसे जुड़े पहलुओं प्रसंग को नई पीढ़ी तक पहुंच पा रहे हैं। एक अकादमी के अध्यक्ष एक रिटायर्ड आयुर्वेद अधिकारी के इर्द गिर्द घूमता यह आयोजन इस समीक्षा के लिए बाध्य करता है कि शासकीय खर्चे पर हो रहे इतने बड़े आयोजन से लोगों के नहीं जुड़ पाने का आखिर कारण क्या है? क्यों शीर्ष अधिकारी इन्हीं के कंधों पर सब कुछ सौंप देते हैं ? क्यों आयोजन समिति में दबदबा बनाए रखने के बाद यह नए लोगों को प्रवेश नहीं देने के लिए प्रपंच रचते हैं ? क्यों नएपन परहेज करते हैं ? इस वर्ष भी इन लोगों ने जैसे तैसे कार्यक्रम तो निपटा लिया परंतु इसकी आड़ में की गई उगाही की भी चर्चा है ।बताते चलें कि विगत कुछ वर्षों से पिछले सरकार ने इस आयोजन को संस्कृति विभाग के माध्यम से कराया जाना तय किया है और इसके लिए शासन द्वारा राशि भी दी जाती है इसके बावजूद भी बैरिस्टर स्मृति समारोह या इसी तरह के अन्य आयोजनों के नाम पर चंदा उगाही के कारनामे जग जाहिर हैं।
आमंत्रण पत्र में दर्जनों नाम, मंच सूना दर्शक दीर्घा में कुर्सियां खाली
17 सितंबर को उद्घाटन के लिए छापे गए कार्ड में विधायकों, प्रभारी मंत्री, नेता प्रतिपक्ष एवं दर्जन भर आयोग निगम के अध्यक्षों, सदस्यों के नाम कार्ड में छपे थे। लेकिन ये ज्यादातर नजर आए और ना ही दर्शक दीर्घा में लोग देखें गए। गनीमत है जिन बच्चों और प्रतिभाओं को पुरस्कृत किया जाना था वह दर्शक दीर्घा में बैठे थे अन्यथा 50 कुर्सियां भी खाली रह जाती शहर के जनप्रतिनिधि ही नहीं आम लोग भी आयोजन स्थल के आसपास नहीं फटकते। हालांकि लोगों को रिझाने, लुभाने के लिए आर्केस्ट्रा,छत्तीसगढ़ी गीत संगीत का आयोजन किया जाता है इसके बावजूद लोगों का नजर नहीं आना ताज्जुब से परे है।
बाहरी कलाकारों को लाखों,स्थानीयों को खुरचन
स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन का दावा इस मंच में खोखला दिखता है ।बाहर से आये कलाकारों को लाखों का भुगतान परन्तु स्थानीय कलाकारों को इनकी खुरचन ही मिलती है।
नई पीढ़ी को रखा किनारे,बच्चों की सहभागिता शून्य
इस बार स्कूली बच्चों से परहेज रखा गया था। जबकि यह एक बेहतर मंच होता जिसमे बैरिस्टर साहब के व्यक्तित्व, कृतित्व,जीवनी पर आधारित तथ्यों को क्विज,निबंध ,चित्रकला,तात्कालिक भाषण के जरिये नही पीढ़ी को हस्तांतरित किया जा सकता। मानो वे टुकड़े टुकड़े में उसे बाँट लें। विडम्बना यह कि यदि इस कार्यक्रम में बच्चे शामिल भी हों तो उनका अनुभव अच्छा नहीं। बच्चों व शिक्षकों को दुत्कारा जाता है कार्यक्रम के नाम पर। जबकि ये निःशुल्क दो दिनों तक इनके मंच को रिक्त होने से बचाते हैं। विडम्बना स्थानीय कलाकारों का चयन भी एक रिटायर्ड आयुर्वेद डॉक्टर अपनी मनमर्जी से करते हैं जिन पर उनकी कृपा होगी उसे फीस वह मोटी भारी-भरकम रकम और जिन्हें में पसंद नहीं करते उन्हें एक कागज का टुकड़ा तक नहीं मिलता मोमेंटो तो दूर की बात है।
दिखावा के लिए महज 3 स्टाल, स्टालों को पुरस्कार भी नहीं
इसे शर्म की बात ही कहा जायेगा कि महज तीन स्टाल इस आयोजन में लगे।
जी हुजूरी व कोर्निश बजाने वाले दरबारी हावी
मंच माला का मोह नहीं छूट रहा एक रिटायर्ड अधिकारी का। पहले डॉक्टरी छोड़ अफसर परिक्रमा में व्यस्त रहते थे अधिकारियों के अब सेवानिवृत्त होने के बावजूद दखल व अफसरी का फितूर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेसी नेता बने फिर रहे ये आयुर्वेद रिटायर्ड अधिकारी अफसरों को भरम में रख सब कुछ अपने कब्जे में रखना चाहते हैं।
बैरिस्टर के नाम पर बन्द हो दुकानदारी
पूरे बैरिस्टर स्मृति आयोजन को उनके नाम से अकादमी बनाकर इसके स्वयंभू अध्यक्ष में हाईजैक करके रखा है जिसे इस आयोजन से दूर करने की आवश्यकता अब दिख रही है अंदरूनी सूत्रों के अनुसार इनकी हरकतों से न केवल जिला प्रशासन बल्कि उनके समाज के लोग भी नाराज रहते हैं और यह आयोजन बैरिस्टर साहब के नजदीकी लोगों से भी दूर हो चला है।
ये केवल उदघाटन समापन के संचालक
दुसरे व्यवसायिक सहायक शिक्षक व कवि साहित्यकार जिन्होंने शायद ही स्कूल में एक कक्षा नहीं ली हो पर आयोजन के बहाने अफसरों पर रुतबा झाड़ने से पीछे नहीं हटते ,केवल उद्धाटन समापन के मंच संचालक बनकर खुद की पीठ थपथपाते हैं,बाकी समय वरिष्ठों को भी सहायक बताकर शेखी पधारने की बड़ी चर्चा है कहा जा रहा है कि सब कार्यो को लीड करने का ढोंग कोई कार्य ढंग से नहीं कर पाते।



