मनेंद्रगढ़ वन मंडल के डी एफ ओ की तानाशाही से त्रस्त रेंजर क्या उच्चाधिकारियों से करेंगे सामूहिक शिकायत, सूत्रों की मानें तो रेंजर एसोसियेशन तक शिकायत की है तैयारी…

मनेंद्रगढ़ वन मंडल के डी एफ ओ की तानाशाही से त्रस्त रेंजर क्या उच्चाधिकारियों से करेंगे सामूहिक शिकायत
सूत्रों की मानें तो रेंजर एसोसियेशन तक शिकायत की है तैयारी
एमसीबी। कभी सुने थे की हिटलर अपने सूबे का बड़ा तानाशाह था कहा जाता था की जिसकी मर्जी के बिना एक परिंदा भी अगर पर मार देता तो वो मार दिया जाता था। अब हिटलर बाबू तो चले गए लेकिन उनके कुछ कार्बन कॉपी आज भी समय समय पर दस्तक दे जाते हैं। आप समझ सकते हैं की अगर किसी की तुलना ऐसे तानाशाह शख्स से की जाए तो बात बड़ी रोचक और हैरानी में डाल देने जैसी हो जाती है।जी हां आप ठीक समझ रहे हैं। बीते एक वर्षों से मनेंद्रगढ़ वन मंडल के डी एफ ओ की मनेंद्रगढ़ वन महकमे में हिटलर शाही चरम पर देखी जा रही है।और ये हम नहीं बल्कि विभाग में पदस्थ तीन स्टार फुल फ्लैस्ड रेंजरों की आपबीती है। और सूत्रों से प्राप्त जानकारी है। हालांकि वन मंडल में पदस्थ रेंजरों ने ब्यक्तिगत तौर पर नाम ना छापने की शर्त पर बताया। जिसके मद्देनजर जो बातें बाहर निकलकर आईं वो चौकाने वाली है। सूत्रों ने बताया की अगर डी एफ ओ साहब के मुताबिक रेंजर चढ़ावा नही देते तो उन्हे वो कई तरीके से प्रताड़ित करते हैं या ये भी कह सकते हैं की वनों में कराए जाने वाले कार्यों का भुगतान रोक देने की बात कहते हैं। जिसके बाद सामान्य तौर पर ये भी स्पष्ट हो जाता है की आखिर डिप्टी रेंजरों से इनकी नजदीकी और उनके ये मुरीद क्या इसी वजह से रहते हैं की इनकी भारी भरकम कमी,,? की डिमांड सिर्फ वो ही पूरी कर पाते हैं।जबकि तीन स्टार फुल फ्लैश्ड रेंजर ये इसलिए नही करते क्यू की ये कुर्सी इनकी खुद की होती है और खुद को धार में रखकर वनों के संरक्षण बावत और किए जाने वाले निर्माण कार्यों की राशि का गलत तरीके से बंदरबांट नही कर सकते। और शायद यही इनके परेशानी की वजह साबित हो रही है।
रेंजरों में आपसी चर्चा का दौर है गर्म,,,
आपको बता दें की इन्ही सब वजह के कारण मनेंद्रगढ़ वन मंडल के तीन स्टार फुल फ्लैश्ड रेंजरों के बीच आपसी चर्चा का दौर काफी गर्म है। विभाग की अंदरूनी गतिविधियों पर बेशक इनको अधिकार प्राप्त है। पर बैठकों में रेंजरों से बेवजह झल्लाना और असामान्य व्यवहार करना क्या मानसिक प्रताड़ना की श्रेणी में नहीं आता। जिसके बाद अगर रेंजरों में आपसी चर्चा का दौर ब्याप्त न हो तो क्या होगा।सूत्र बताते हैं की और असामान्य व्यवहार करना क्या मानसिक प्रताड़ना की श्रेणी में नहीं आता। जिसके बाद अगर रेंजरों में आपसी चर्चा का दौर ब्याप्त होता है तो शायद गलत भी नहीं है।सूत्र बताते हैं की अगर जल्द ही राजधानी में बैठे वन महकमे के जिम्मेदारों के द्वारा इस संबंध में कोई पहल नहीं की जाती है तो ये बातें अखबारों के बाद रेंजर एसोसिएशन तक भी तलब की जा सकतीं हैं जिसके पूरे आसार दिख रहे हैं।बहरहाल इन सभी बातों की पुष्टि हम नही करते लेकिन सूत्रों से मिल रहे तथ्यों को भी दरकिनार किया नही जा सकता।जो जांच का विषय भी है।



