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PHP Security Flaw Risk: साइबर सुरक्षा पर एआई का बड़ा हमला, इंटरनेट की 75 फीसदी वेबसाइटों पर मंडराया संकट

नई दिल्ली। PHP Security Flaw Risk: दुनिया की लगभग 75 प्रतिशत वेबसाइटों के बैकएंड को संचालित करने वाली लोकप्रिय प्रोग्रामिंग भाषा पीएचपी (PHP) में पिछले दो दशकों से छिपी एक अत्यंत गंभीर सुरक्षा खामी का खुलासा हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल्स की मदद से उजागर की गई इस तकनीकी चूक ने दुनिया भर की कंपनियों, सरकारी संगठनों और वित्तीय संस्थानों के सामने बड़ा व्यावसायिक संकट पैदा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी जारी की है कि हैकर्स ने इस खामी का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर साइबर हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे लाखों सर्वरों के ठप होने और भारी वित्तीय नुकसान की आशंका बन गई है।

इस सुरक्षा सेंध को तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा ‘पीएचपी2शेल’ (PHP2Shell) का नाम दिया गया है। साइबर सुरक्षा अनुसंधान से जुड़ी फर्मों ‘कैलिफ’ और ‘विज’ के अनुसार, कोड के भीतर यह खामी पिछले 20 वर्षों से मौजूद थी, जिसे किसी इंसानी हैकर द्वारा पकड़ना और इसका फायदा उठाना लगभग असंभव था। हालांकि, आधुनिक एआई तकनीकों की वजह से अब हैकर्स के लिए इस तरह की जटिल कमियों को पहचानकर स्वचालित और त्वरित गति से हमले करना बेहद आसान हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई के कारण साइबर हमलों का दायरा और तीव्रता दोनों अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुके हैं।

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इस तकनीकी संकट का सीधा असर अब वास्तविक दुनिया की बुनियादी सेवाओं पर दिखाई देने लगा है। सुरक्षात्मक उपायों के तहत नीदरलैंड्स में रोटरडैम पोर्ट, सरकारी पोर्टल, अस्पतालों और प्रमुख राजनीतिक दलों की आधिकारिक वेबसाइटों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। इसी तरह डेनमार्क में राष्ट्रीय स्कूल प्लेटफॉर्म और फ्रांस के गृह मंत्रालय की वेबसाइटों को भी मेंटेनेंस मोड में डाल दिया गया है। जो भी संस्थाएं अपने ग्राहकों को ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करने या दैनिक कामकाज के लिए पीएचपी-आधारित प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर हैं, उनके लिए यह महज एक आईटी समस्या न रहकर एक गंभीर परिचालन खतरा बन चुकी है।

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तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, वर्डप्रेस (WordPress), ड्रूपल (Drupal), जूमला (Joomla) और मैजेंटो (Magento) जैसे विश्व प्रसिद्ध कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) पीएचपी पर ही आधारित हैं। इंटरनेट इंटेलिजेंस फर्म ‘सेंसिस’ के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर चिन्हित लगभग 26 लाख होस्ट्स में से करीब 15 लाख होस्ट्स ऐसे पुराने पीएचपी वर्जनों पर चल रहे हैं, जिनके लिए अब डेवलपर्स द्वारा कोई सुरक्षा अपडेट भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि बिना आधिकारिक सुरक्षा पैच वाले ये सभी सर्वर हैकर्स के सीधे निशाने पर आ चुके हैं।

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वैश्विक स्तर पर टेक दिग्गजों ने भी इस खतरे की पुष्टि की है। अमेजॉन के सुरक्षा विभाग ने जानकारी दी है कि अक्टूबर महीने के मध्य से ही इस खामी को साधकर सिस्टम में घुसपैठ करने की कोशिशों के संकेत मिले थे। इससे पहले भी आईटी जगत को जावा की लॉग4जे (Log4j) लाइब्रेरी, लिनक्स के शेलशॉक और विंडोज के एसएमबी प्रोटोकॉल में मिली खामियों (वन्नाक्राई) जैसे भीषण साइबर खतरों का सामना करना पड़ा है। साइबर विशेषज्ञों ने छोटे व मध्यम स्तर के व्यावसायिक ऑपरेटरों को सतर्क करते हुए अपने पीएचपी वर्जनों और सीएमएस प्लेटफॉर्म्स को तुरंत अपडेट करने की सिफारिश की है।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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