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चीन में तख्तापलट की कोशिश! जान बचाकर भागे जिनपिंग, मुठभेड़ में 9 गार्ड मरे, मचा हड़कंप

बीजिंग: चीन की सत्ता के शीर्ष गलियारों से एक सनसनीखेज दावा सामने आया है, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अंतरराष्ट्रीय स्रोतों और चीन के बाहर रह रहे विश्लेषकों के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ एक बड़े सैन्य विद्रोह (Coup Attempt) की कथित साजिश नाकाम कर दी गई। हालांकि, चीनी सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम को सेना में अनुशासन सुधार और भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई करार दिया है, लेकिन बाहरी रिपोर्टें इसे सत्ता संघर्ष से जोड़कर देख रही हैं।

कथित साजिश का केंद्र बना बीजिंग का जिंगशी होटल
कनाडा में रह रहीं चीनी लेखिका शेंग शुए के हवाले से दावा किया गया है कि यह योजना 18 जनवरी की शाम को अंजाम दी जानी थी। कथित तौर पर सेना के प्रभावशाली जनरल झांग यूश्या और रणनीतिक मामलों के प्रमुख ल्यू झेनली इस साजिश के केंद्र में थे।

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बताया जा रहा है कि पश्चिमी बीजिंग स्थित जिंगशी होटल को इसलिए चुना गया क्योंकि शी जिनपिंग वहां ठहरने वाले थे। सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति का ठिकाना अक्सर बदला जाता है, लेकिन कथित विद्रोहियों को लगा कि वहीं उन्हें हिरासत में लेना आसान होगा।

योजना लीक होने के बाद हालात बदले
रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑपरेशन शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही शी जिनपिंग को इस साजिश की जानकारी मिल गई। इसके बाद उन्होंने होटल छोड़ दिया और सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर डाल दिया।
जब कथित विद्रोही वहां पहुंचे तो हालात उनकी उम्मीद के बिल्कुल उलट थे। दावों के मुताबिक, सुरक्षा बलों और विद्रोही गुट के बीच भीषण मुठभेड़ हुई, जिसमें कई लोग मारे गए। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

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गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई के संकेत
कहा जा रहा है कि विद्रोह विफल होते ही शी जिनपिंग ने संबंधित सैन्य अधिकारियों और उनके करीबी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए। इसके कुछ दिन बाद सरकारी मीडिया में इसे सेना में सुधार अभियान और अनुशासन उल्लंघन पर कार्रवाई बताया गया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी तेजी से आधिकारिक बयान जारी करना इस ओर इशारा करता है कि सरकार हालात को पूरी तरह नियंत्रण में दिखाना चाहती थी।

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विद्रोह की जड़ में क्या था डर?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में चीन की सेना और कम्युनिस्ट पार्टी में लगातार बड़े अधिकारियों को हटाया गया है। भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के नाम पर हो रही इन कार्रवाइयों से कई शीर्ष सैन्य अधिकारी असहज थे। माना जा रहा है कि इसी भय और अविश्वास के माहौल ने कथित साजिश को जन्म दिया।

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आगे क्या?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद शी जिनपिंग की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में या तो सेना की संरचना में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे या फिर चीन की राजनीति में और सख्ती बढ़ेगी।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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