Big Relief After Jauhar University Row: विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायत से पास नक्शों पर योगी सरकार का बड़ा फैसला

रामपुर/लखनऊ। रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों के मानचित्र (Building Map) को लेकर उपजे लंबे क्षेत्राधिकार विवाद के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में भवन मानचित्रों के विनियमितीकरण (Regularization) को लेकर एक बड़ा और युगांतकारी नीतिगत निर्णय लिया है। शासन द्वारा जारी किए गए नए शासनादेश के तहत अब विकास प्राधिकरणों के दायरे में आने वाले उन सभी भवनों के मामलों के निस्तारण का रास्ता साफ हो गया है, जिनके नक्शे जिला पंचायतों द्वारा स्वीकृत किए गए थे।
सरकार के इस कदम से लंबे समय से लंबित पड़े हजारों प्रशासनिक और क्षेत्राधिकार संबंधी विवादों का हमेशा के लिए निपटारा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
महायोजना और भू-उपयोग के अनुरूप बने भवनों को मिलेगा लाभ
उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन, पी. गुरु प्रसाद की ओर से जारी किए गए आधिकारिक शासनादेश के मुताबिक, विकास प्राधिकरण क्षेत्रों के भीतर जिला पंचायतों द्वारा मानचित्र स्वीकृत किए जाने के कारण लंबे समय से कई प्रशासनिक विसंगतियां और कानूनी अड़चनें सामने आ रही थीं। इन समस्याओं को स्थायी रूप से दूर करने के लिए शासन ने विशेष विनियमितीकरण व्यवस्था लागू की है।
इस नई नीति के तहत, यदि किसी नागरिक का भवन संबंधित क्षेत्र की विकास महायोजना (Master Plan) और निर्धारित भू-उपयोग (Land Use) के मापदंडों के सर्वथा अनुरूप बना पाया जाता है, तो उसे नियमानुसार तत्काल नियमित कर दिया जाएगा। वहीं, जिन मामलों में तकनीकी रूप से भू-उपयोग परिवर्तन (Land Use Change) अनिवार्य होगा, वहां शासन द्वारा निर्धारित विकास शुल्क जमा कराकर नियमितीकरण की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।
छोटे भूखंड स्वामियों को तोहफा: 200 वर्गमीटर तक 100% शुल्क माफ
योगी सरकार ने इस नीति में मध्यम और निम्न आय वर्ग के मकान मालिकों का विशेष ध्यान रखा है:
- आवासीय भूखंडों को राहत: जिन नागरिकों के पास 200 वर्गमीटर या उससे कम क्षेत्रफल के आवासीय भूखंड (Residential Plots) हैं, उनके लिए सरकार ने एक बड़ा लोक-कल्याणकारी कदम उठाया है।
- शुल्क में पूर्ण छूट: ऐसे सभी छोटे आवासीय भवनों के मालिकों को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 100 प्रतिशत की पूरी छूट देने का फैसला किया गया है। इससे आम जनता को बिना किसी बड़े आर्थिक बोझ के अपने आशियाने को वैध कराने का सीधा अवसर मिलेगा।
सरकारी जमीनों और जलाशयों पर अवैध निर्माण करने वालों पर सख्ती बरकरार
राहत के इस बड़े पिटारे के बीच योगी सरकार ने भू-माफियाओं और अवैध निर्माणकर्ताओं को कड़ा संदेश भी दिया है। शासनादेश में यह पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया गया है कि कुछ क्षेत्रों में नियमों का उल्लंघन करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा:
नियमितीकरण के दायरे से बाहर की संपत्तियां:
- सार्वजनिक जलाशयों, तालाबों, कुओं और नदी बेसिन क्षेत्रों पर किए गए अतिक्रमण।
- विकास प्राधिकरणों के महायोजना (Master Plan) मार्गों और हरित पट्टियों (Green Belts) पर बने निर्माण।
- किसी भी प्रकार की सरकारी, नजूल या ग्राम सभा की भूमि पर अवैध रूप से खड़े किए गए ढांचे।
इन श्रेणियों में आने वाले किसी भी निर्माण का किसी भी स्थिति में विनियमितीकरण नहीं किया जाएगा और उन पर ध्वस्तीकरण की कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
बैक डेट के फर्जीवाड़े पर रोक के लिए 15 दिन की समय-सीमा
भविष्य में होने वाली किसी भी संभावित प्रशासनिक गड़बड़ी और बैक डेट (पुरानी तारीखों) में नक्शा पास करने जैसी वित्तीय अनियमितताओं पर पूर्ण विराम लगाने के लिए भी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। शासन ने सभी जिला पंचायतों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे 1 अप्रैल 2026 तक उनके द्वारा स्वीकृत किए जा चुके सभी मानचित्रों की एक पूर्ण, सत्यापित और प्रमाणित सूची 15 दिनों के भीतर संबंधित विकास प्राधिकरणों और आवास विभाग के मुख्यालय को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं।
सरकार का साफ मानना है कि इस पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था से जहां एक ओर वास्तविक और नियम सम्मत लाभार्थियों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर भू-उपयोग के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले अवैध निर्माणों पर नकेल कसने में मदद मिलेगी।



