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छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पादेश- विदेशराज्य एवं शहररायपुर

शिक्षा गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रभारी प्रधान पाठक ने की चतुष्कोणीय बैठक, आपसी चर्चा कर दी जानकारी

जांजगीर-बिर्रा। बीआरसीसी एच के बेहार के मार्गदर्शन में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सेमरिया(बम्हनीडीह) के प्रभारी प्रधान पाठक उमेश कुमार दुबे ने विद्यार्थियों की नींव मजबूत करने व शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शासकीय प्राथमिक पूर्व माध्यमिक शाला सेमरिया के शाला प्रबंधन समिति,पालक, शिक्षक व छात्र-छात्राओं की चतुष्कोणीय आवश्यक बैठक की गई। बैठक में हैंडराइटिंग, मध्यान भोजन,कमजोर बच्चों का चिन्हांकन,छात्र व शिक्षक की उपस्थिति,विद्यालय में मेंटर,मासिक परीक्षा,निशुल्क पाठ्य पुस्तक वितरण,गणवेश वितरण, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता,छात्र-छात्राओं हेतु शौचालय,पौधा रोपण व हरियाली,किचन गार्डन विद्यार्थियों के सीखने की स्थिति आदि बातें रखीं गई। जिसमें सभी ने विस्तार से चर्चा किए। आपसी चर्चा उपरांत प्रभारी प्रधान पाठक उमेश कुमार दुबे ने जानकारी दी कि नई शिक्षा नीति 2020 लागू होने से पाठ्यक्रम बदल गये हैं।नये पाठ्यक्रम को बेहतर करने के लिए सूक्ष्मता से समझकर इसका लाभ बच्चों तक पहुंचाया जा सके।
नवीन पाठ्यक्रम की विशेषताएं-
दुबे ने कहा कि पाठ को गतिविधियां आधारित,आकर्षक मनोरंजक,चित्रित,समझ आधारित,अनुप्रयोग,चर्चा परिचर्चा,विश्लेषण अन्वेषण सरलता से किया जा सके। जिससे आवश्यक कौशलों की प्राप्ति हो सकेगी।
पाठ्यक्रम नया है-
दुबे ने कहा कि नये पाठ्यक्रम में खेल खेल में शिक्षा,शारीरिक शिक्षा,कला शिक्षा,योग शिक्षा,नैतिक शिक्षा,पर्यावरण शिक्षा,भाषा शिक्षा,गणितीय खेल को शामिल किया गया है।
जिसको विद्यालयों में बेहतरीन ढंग से सिखाया जाए।सुनना,बोलना पढ़ना, लिखना,तर्क करना,सोचना, समझना,प्रश्न करना,उत्तर देना आदि कौशलों की प्राप्ति कराया जा रहा है।
नियमित अभ्यास-
दुबे ने कहा कि सभी कक्षाओं के बच्चों को सिखाने के लिए अभ्यास के साथ पढ़ाया जाना। नियमित अभ्यास करवाना। कठिन लग रहे चरण पर फोकस करना।
बच्चों में समझ का विकास करना। बच्चों को सही शिक्षण विधि व अलग-अलग शिक्षण विधि/तकनीक से पढ़ाना।
बच्चों का बेहतर मार्गदर्शन करना। सभी बच्चों की जिम्मेदारी लेना। सभी बच्चों पर फोकस करना। बच्चों के स्तर आधारित प्रश्न करना व प्रश्न देना। बच्चों के स्तर को बढ़ाना।बच्चों में उत्साह बनाए रखना। सतत् प्रयास व सतत मूल्यांकन करना। बच्चों की शिक्षा स्तर की वास्तविक स्थिति से पालकों को अवगत कराया जाना।अध्याय/इकाई के किसी पाठ को दोहराया जाना।दीवार या ड्राइंग शीट पर गणित के सूत्रों को लिखकर चस्पा करना।बच्चों को प्रोजेक्ट कार्य देना। बच्चों को असाइनमेंट लिखने को देना आवश्यक है।
परीक्षा का आयोजन-
विद्यालय में सभी कक्षाओं के बच्चों के लिए परीक्षा में पास होने के लिए प्री तैयारी कराना। जैसे तिमाही,छमाही, वार्षिक परीक्षा का साथ ही नियमित रूप से इकाई परीक्षा या मासिक आकलन होना व सही ढंग से इसका जांच होना। शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राजू साहू व गांव के प्रथम नागरिक सरपंच ईश्वरी बाई रामस्वरूप कश्यप ने कहा कि शिक्षा गुणवत्ता सुधार के लिए हम सभी मिलकर कार्य करें तभी शिक्षा गुणवत्ता में सुधार आ सकता है।बच्चों को रोज गृह कार्य देवें और नियमित जांच करें।इस अवसर पर राजू साहू, ईश्वरीबाई रामस्वरूप कश्यप, गुलजार खान,रमेश कश्यप, उमेश कुमार दुबे,एकादशियां मांझी,पितांबर प्रसाद कश्यप, टीकाराम गोपालन,कैलाश खूंटे,अनुपमा जांगड़े,कौशल यादव,संतोष चंद्रा अशोक जांगड़े यूथ एवं इको क्लब के सदस्य व पदाधिकारी आदि उपस्थित थे।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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