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यस बैंक बिकने के बाद SBI समेत 8 बैंकों की होगी चांदी, टैक्स में मिल सकता है बड़ा फायदा

जापानी बैंक सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्प (एसएमबीसी) भारत के बड़े प्राइवेट लेंडर यस बैंक को खरीदने जा रहा है. इस डील में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) समेत 8 बैंक भी अपनी हिस्सेदारी को बेच रहे हैं. इस डील से इन 8 बैंकों को सितंबर तिमाही में बड़ा टैक्स बेनिफिट मिलने की संभावना है. हिस्सेदारी बिक्री से होने वाली 13,483 करोड़ रुपए की इनकम कैपिटल गेन टैक्स से फ्री होगी. सभी रेगुलेटरी स्वीकृतियों के साथ, एसएमबीसी इसी तिमाही में सेकंडरी मार्केट ट्रांजेक्शन के माध्यम से 20 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने का सौदा पूरा करेगा.

बेचने वाले बैंक इनकम को “अन्य आय” के रूप में दर्ज करेंगे. यस बैंक रीकंस्ट्रक्शन स्कीम, 2020 में एक विशिष्ट खंड है जो रीकंस्ट्रक्शन में निवेश करने वाले बैंकों को शेयरों की बिक्री से होने वाले लाभ पर कैपिटल गेन टैक्स से छूट देता है. वैसे सुमितोमो मित्सुई फाइनेंशियल ग्रुप (SMFG) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी SMBC को यस बैंक के बोर्ड में दो नामित निदेशकों की नियुक्ति के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक की मंज़ूरी भी मिल गई है.

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8 बैंकों को मिलेगी टैक्स से राहत
एसबीआई और सात निजी बैंकों – एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा, एक्सिस बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, फेडरल बैंक और बंधन बैंक – ने संयुक्त रूप से 21.50 रुपए प्रति शेयर की दर से 20 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए एक निश्चित समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इन बैंकों ने 2020 में 10 रुपए प्रति शेयर की दर से शेयर खरीदे थे. समझौते के तहत, एसबीआई अपनी 24 फीसदी हिस्सेदारी में से 13.19 फीसदी हिस्सेदारी 8,889 करोड़ रुपए में बेचेगा, जबकि बाकी सात बैंक 4,594 करोड़ रुपए में 6.81 फीसदी हिस्सेदारी बेचेंगे.

टैक्स से ऐसे मिलेगी राहत
अगर टैक्स में छूट नहीं मिलती तो इन 8 बैंकों को 12.5 फीसदी लॉन्गटर्म कैपिटल गेन टैक्स का का भुगतान करना पड़ता. यह धारा यस बैंक रीकंस्ट्रक्शन स्कीम में उन बैंकों के लिए सौदे को आसान बनाने के लिए जोड़ी गई थी जो बैंक को बचाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक पूंजी निवेश में भाग लेने से हिचकिचा रहे थे. योजना में कहा गया है कि निवेशक बैंक और इस योजना के तहत रीस्ट्रक्चर्ड बैंक के शेयरों में निवेश करने वाले निवेशक, ऐसे निवेशों से होने वाले किसी भी कथित लाभ या प्राप्ति पर आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के तहत कैपिटल गेन टैक्स का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे.

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बैंकों को मिलेगी राहत
यस बैंक का ट्रांजेक्शन सेलिंग बैंकों के लिए एक राहत की तरह है क्योंकि उनमें से अधिकांश के शुद्ध ब्याज मार्जिन में कुछ कमी आने की संभावना है क्योंकि वे नीतिगत दरों में कटौती का लाभ उधारकर्ताओं को दे रहे हैं. बॉन्ड सील्ड में वृद्धि के कारण फिस्कल बेनिफिट में भी कमी आने की उम्मीद है. इस बात की भी चिंता है कि जीएसटी स्लैब में कटौती से फिस्कल डेफिसिट बढ़ सकता है और साथ ही तत्काल दरों में कटौती की कोई उम्मीद नहीं है. एसबीआई, जिसने वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में 19,160 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था, को सबसे अधिक लाभ होगा.

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अब ऐसे बढ़ा सकता है हिस्सेदारी
एसएमबीसी को यस बैंक में अपनी हिस्सेदारी 24.99 फीसदी तक बढ़ाने के लिए आरबीआई से मंज़ूरी मिल गई है. मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह शेष 4.99 फीसदी हिस्सेदारी या तो निजी इक्विटी फर्मों एडवेंट और कार्लाइल से खरीद सकता है या निजी बैंक द्वारा जारी किए जाने वाले तरजीही शेयरों में निवेश कर सकता है. इसके अलावा, एसएमबीसी, लोन (8,500 करोड़ रुपए) और इक्विटी (7,500 करोड़ रुपए) के संयोजन के माध्यम से यस बैंक में 16,000 करोड़ रुपए निवेश करने के लिए यस बैंक के साथ बातचीत कर रहा है. बैंक के बोर्ड ने धन उगाहने के लिए शेयरधारकों की मंज़ूरी प्राप्त कर ली है. अगस्त में, आरबीआई ने बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एसएमबीसी के आवेदन को मंज़ूरी दे दी थी, जबकि सितंबर की शुरुआत में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने इस प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी थी.

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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