पत्रकार पर रिश्वतखोरी का आरोप: खबर दबाने के लिए पटवारी से मांगे 15 हजार, ऑडियो वायरल…

बिलासपुर। बंजर भूमि को कृषि भूमि बताकर धान विक्रय के लिए किए गए फर्जी भौतिक सत्यापन का मामला अब एक नया मोड़ ले चुका है। जिस पत्रकार ने इस खबर को उजागर किया था, अब उसी पर गंभीर आरोप लगे हैं। वायरल हुए एक ऑडियो में दावा किया जा रहा है कि खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार ने पटवारी से 15 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
ऑडियो में खुलासा: “अगर रिश्वत नहीं दोगे तो खबर फिर छपेगी”
मिली जानकारी के अनुसार, एक व्यक्ति के माध्यम से हल्का पटवारी (हल्का नंबर 02) से पैसे मांगे गए। वायरल ऑडियो में यह स्पष्ट सुना जा सकता है कि उक्त व्यक्ति संवाददाता और तहसीलदार का नाम लेते हुए पटवारी से 15,000 रुपये देने की बात कर रहा है। इसमें यह भी कहा गया कि यदि राशि नहीं दी गई, तो खबर दोबारा प्रकाशित की जाएगी, जिससे प्रशासनिक जांच शुरू हो सकती है।
पटवारी द्वारा रकम कम करने की गुजारिश के बाद, उस व्यक्ति ने 10,000 रुपये में मामला निपटाने की बात कही। साथ ही यह भी कहा गया कि तहसीलदार को पटवारी स्वयं “मैनेज” कर ले।
तहसीलदार की संलिप्तता पर सवाल
ऑडियो में तहसीलदार का भी जिक्र किया गया है, जिससे यह संदेह पैदा होता है कि वे भी इस मामले में शामिल हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि पत्रकार और तहसीलदार के बीच करीबी संबंध हैं, और कई बार इस तरह के मामलों में पैसे लेकर समझौता किया जाता है।
क्या पत्रकारिता के नाम पर हो रही वसूली?
इस घटना ने मीडिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पत्रकारिता का इस्तेमाल दबाव बनाकर पैसा लेने के लिए किया जा रहा है, तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बदनाम करने जैसा है।
प्रशासन क्या करेगा?
ऑडियो की फॉरेंसिक जांच: सत्यता की पुष्टि की जाएगी।
कानूनी कार्रवाई: यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो पत्रकार और संबंधित अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार व जबरन उगाही की धाराओं में एफआईआर दर्ज हो सकती है।
मीडिया संगठन की भूमिका: पत्रकार की भूमिका की जांच कर उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।



