जांजगीर में महिला पुलिसकर्मियों के सम्मान और न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन का ऐलान, संयुक्त पुलिस संघ ने उठाए सवाल
10 अक्टूबर को मैदान में जुटने की अपील; पीड़ित महिला पुलिसकर्मियों को न्याय, कथित शोषण पर रोक और रक्षित निरीक्षक को हटाने की मांग

जांजगीर-चांपा। पुलिस की वर्दी पहनकर आम नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों का सवाल अब जांजगीर में एक नए विवाद के रूप में सामने आया है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ ने महिला पुलिसकर्मियों के कथित शोषण और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर आवाज उठाने का ऐलान किया है।
संगठन की ओर से जारी पोस्टर में 10 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे जांजगीर मैदान में एकत्र होने की अपील की गई है। पोस्टर में संगठन ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं- पीड़ित महिला पुलिसकर्मियों को न्याय दिलाना, कथित शोषण बंद कराना और रक्षित निरीक्षक को पद से हटाना। हालांकि, इन आरोपों और मांगों के संबंध में पुलिस विभाग का आधिकारिक पक्ष तथा प्रदर्शन की प्रशासनिक अनुमति स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हो सकी है।
महिला पुलिसकर्मियों के सम्मान का सवाल केंद्र में
संगठन के पोस्टर में ‘नारी के सम्मान में मैदान में’ का नारा दिया गया है। इसके जरिए महिला पुलिसकर्मियों के सम्मान, कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल और शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई गई है। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस विभाग में शिकायतों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही का सवाल सीधे विभाग की कार्यसंस्कृति से जुड़ता है।
यदि किसी कर्मचारी के साथ दुर्व्यवहार या शोषण हुआ है, तो तथ्यों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, किसी अधिकारी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर निष्पक्ष जांच से पहले दोष तय करना भी उचित नहीं होगा।
उज्जवल दीवान के नेतृत्व में संगठन की मांगें
पोस्टर में संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष के रूप में उज्जवल दीवान का नाम और संपर्क नंबर दिया गया है। संगठन की मांगों में रक्षित निरीक्षक को हटाने का मुद्दा भी प्रमुखता से शामिल है। उल्लेखनीय है कि संगठन ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की मांग की थी। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही हो सकती है।
अब प्रशासन के रुख पर नजर
10 अक्टूबर को प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर अब पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। क्या संगठन को प्रदर्शन की अनुमति मिली है? महिला पुलिसकर्मियों से संबंधित शिकायतों पर विभाग ने क्या कार्रवाई की है? और रक्षित निरीक्षक के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर है? इन सवालों के जवाब आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
फिलहाल, संगठन ने अपने पोस्टर के माध्यम से आवाज बुलंद करने का संदेश दिया है। अब यह देखना होगा कि मामला प्रदर्शन तक सीमित रहता है या संबंधित शिकायतों की जांच और विभागीय कार्रवाई के स्तर पर भी कोई ठोस प्रगति होती है।



